POEMS: फौजियों की होली, डयूटी पर तैनात थे, गहरा सन्नाटा था छाया,हो जाये कुछ बात , फ़ौजी के मन में आया

फौजियों की होली, डयूटी पर तैनात थे, गहरा सन्नाटा था छाया,हो जाये कुछ बात , फ़ौजी के मन में आया

POEMS: फौजियों की होली, डयूटी पर तैनात थे, गहरा सन्नाटा था छाया,हो जाये कुछ बात , फ़ौजी के मन में आया

''फौजियों की होली"

डयूटी पर तैनात थे, गहरा सन्नाटा था छाया!
हो जाये कुछ बात , फ़ौजी के मन में आया!! 

क्या बात है भाई, आज तो तू बड़ा उदास है!
चेहरे पर हसीं नही, कुछ तो बात ये खास है!!

धीमे से मुस्काया फौजी, मुँह को खोल उठा!
लेकर  आह एक दर्द भरी, वो ये बोल उठा!!

माँ का फोन आया था, पूछ रही थी सवाल!
ये होली हमारे संग, मनाएगा क्या मेरे लाल!!

गुड़िया तो बोली पापा, इसबार तुम्हे आना है!
होली का त्योहार अब, हमारे साथ मनाना है!!

वो पगली झूम रही,होली पर साजन आएंगे!
लगाए रंग गालों पर, मस्ती में खिल जाएंगे!!

"मलिक" कहे बावरे,वर्दी का कर्ज चुकाना है!
दुश्मन की छाती तेरी , गोली का निशाना है!!

टूटी निंद्रा फौजी की, उसने ताना फिर सीना!
देश परिवार उसका,उसके लिए मरना जीना!!

रक्षा करने को फौजी,पल में थे फिर पूरे तैयार!
गोलियां भरकर उठाया, उसने बंदूक हथियार!

"सुषमा" कहे नजर लगे ना,देश के लाल को!
रंगीन त्योहार फौजी के,जिंदगी खुशहाल हो!!

सुषमा मलिक "अदब"
रोहतक (हरियाणा)