POEM:पोखरण दिवस पर स्व-रचित पंकज मलिक की कुछ पंक्तिया

पोखरण दिवस पर स्व-रचित पंकज मलिक की कुछ पंक्तिया

POEM:पोखरण दिवस पर स्व-रचित पंकज मलिक की कुछ पंक्तिया

         वो पोखरण नही स्वाभिमान था,

मेरे देश का सम्मान था..
किया विश्व में जिसने हमे सिरमौर
वो अटल अभियान था..

न भूला है न भूलेंगे,हम अपने इस आत्मसम्मान को
छाती अपनी चीरकर दिखा दी ताकत सारे जहान को
हिन्दुस्तान अपनी धरती पर दुश्मन को न सह पायेगा
किया किसी ने दुस्साहस तो करारी चोट वो खायेगा

ये पोखरण तो मात्र एक आह्वान है,
किसी ने अगर की तिरछी आँखे, तो मौत ही उसका अंजाम है...

अटलविश्वास की यह भूमि ऐसे ही शौर्य दिखलाएगी..
जब जब किसी दुश्मन की आहट भी अगर  आएगी..
तो ऐसे सैकड़ो अभियान ,फिर से वीरभूमि दोहराएगी
तभी तो हमारी मातृभूमि, भारतमाता कहलाएगी......... पंकज मलिक