BIG NEWS : आई.यू.एम.एस को निरस्त करने की मांग, अभाविप ने कलेक्टोरेट में दिया धरना, नहीं मिला कोई अधिकारी तो कलेक्टर दफ्तर के बाहर लटकाया ज्ञापन

आई.यू.एम.एस को निरस्त करने की मांग, अभाविप ने कलेक्टोरेट में दिया धरना, नहीं मिला कोई अधिकारी तो कलेक्टर दफ्तर के बाहर लटकाया ज्ञापन

BIG NEWS :  आई.यू.एम.एस को निरस्त करने की मांग, अभाविप ने कलेक्टोरेट में दिया धरना, नहीं मिला कोई अधिकारी तो कलेक्टर दफ्तर के बाहर लटकाया ज्ञापन

नीमच। आईयूएमएस को निरस्त करनें की मांग को लेकर अभाविप ने जिला कलेक्टर कार्यालय में धरना प्रदर्शन किया है। जब अवकाश के चलते कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिला तो कार्यकर्ताओं ने एक ज्ञापन जिला कलेक्टर के दफ्रतर के बाहर लटकाया तो दूसरी ज्ञापन कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर लटका दिया है। 

अभाविप की विभाग छात्रा प्रमुख रितु जाट ने जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश में सभी 21 शासकीय विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली को डिजिटल मोड़, ऑटोमेशन में लाने के उद्देश्य से एकीकृत विश्वविद्यालय प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है । इस प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के 24 लाख विद्यार्थियों का अकादमिक डाटा, विश्वविद्यालय के समस्त कर्मचारी और प्राध्यापकों का रिकॉड एक ही प्लेटफॉर्म पर एकत्रित होगा। 

रितु जाट ने बताया कि विश्वविद्यालय की गतिविधियों को डिजिटल मोड में लाना और ऑटोमेशन किया जाना एक स्वागतयोग्य कदम है । लेकिन जिस तरीके से आई.यू.एम.एस कियान्वित किया जा रहा है। व्यवहारिक रूप से सभी विश्वविद्यालयों की अपनी एक अलग विशेषता और आवश्यकता है । ण् आईण्यूण्एम एस ण् बिना किसी मंधन और विमर्श के लागू किया जा रहा है ए जो छात्र हित में उचित नहीं है । 

आईण्यूण्एमण्एसण् लागू करने के पूर्व विश्वविद्यालयों के समस्त हितधारकों ए जिसमें विश्वविद्यालय के कर्मचारी ए प्राध्यापक अधिकारी और छात्र शामिल हैं ण् उनसे कोई चर्चा नहीं की गई और न ही उनके सुझाव लिए गए । यह प्रजातात्रिक प्रक्रिया के अनुकूल नहीं है । २ण् प्रदेश के अधिकांश शासकीय विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों से संबंधित गतिविधियां पहले से ही एमपी ऑनलाइन के माध्यम से पेपरलेस मोड में संचालित की जा रही है । 

उन्होंने बताया कि आईण्यूण्एमण्एसण् माध्यम से उन्हें संचालित किए जाने का कोई औचित्य नहीं है । 8ण् सभी विश्वविद्यालयों की वेवसाइट विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संचालित की जा रही है और विद्यार्थियों से संबंधित सभी जानकारिया वेबसाइट पर दी जा रही है । ऐसे में सभी विश्वविद्यालयों की जानकारियों को एक ही प्लेटफार्म पर ले जाना अव्यवहारिक है और अधिक जटिलता पैदा करेगा । 9 कुछ विश्वविद्यालयों में परीक्षा व्यवस्था आज भी पुराने तरीके से संचालित की जा रहीं हैं । 

उनमें कुछ सुधार यदि संभव है तो किया जाना चाहिए ए लेकिन परीक्षा प्रणाली को ऑटोमेशन पर ले जाना परीक्षा की गोपनियता के दृष्टिकोण से उचित कदम नहीं है । 10ण् एक तरफ पूरे देश में व्यवस्थाओं को विकेंदित करने और अधिक स्वायत्ता करने को लेकर कदम दठाए जा रहे हैं । 11ण् मध्यप्रदेश में आज भी ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में इंटरनेट की उपलब्धता एक समान नहीं है । प्रदेश में बड़ी संख्या में ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी भी उच्च शिक्षा में पढ़ रहे हैं । 

कर्मचारियों ; वेतन द्ध विद्यार्थियों ; स्कॉलरशिप द्ध आदि का 20 एकाउण्ट लिंक होने के कारण भी बृहत प्रोखाधड़ी की संभावना । राम आज तक सभी विश्वविद्यालयों के पाठयकम में समानता नहीं ला सके । सभी रिक्त शैक्षिक व क्षिक पदों की भर्ती नहीं कर सके । विश्वविद्यालय को मिलने वाले सालाना अनुदान में भी पिछली कार ने कटौती की है । 

ऐसे में हम कैसे आईण्एण्एमण्एसण् के स्वप्नों को साकार होते हुए देख सकते हैं । 18ण् अटोमेशन की व्यवस्था में प्रत्येक विश्वविद्यालय के लिए टेलरमेड सिस्टम होना चाहिए । उसमें छात्रों के ज दी गई जानकारियों की सुरक्षा संबंधित विश्वविद्यालय के हाथ में ही होना चाहिए । 

उन्होंने बताया कि 19 राष्ट्रीय शिक्षा नीति में शिक्षण संस्थानों को अधिक स्वायत्ता प्रदान करने के प्रावधान किए गए हैं ए ताकि उनमें शोध और अध्यापन अधिक उपयोगी ए प्रभावी हो सके । आईण्यूण्एमण्एसण् राष्ट्रीय शिक्षा नीति की इस मूल भावना के विपरीत है । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद माननीय कुलाधिपत्ति जी से अनुरोध करती है कि उपरोक्त बिंदुओं के संदर्भ में इंटीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम की समीक्षा कर इसे निरस्त करने का कष्ट करें । 

यह व्यवस्था विश्वविद्यालयों की आंतरिक व्यवस्था में न सिर्फ जटिलता पैदा करेगी ए बल्कि कई बिंदुओं पर व्यवहारिक भी नहीं है । इससे विश्वविद्यालय की स्वायत्ता पर संकट आ सकता है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विश्वविद्यालयों की स्वायत्ता और अकादमिक वातावरण को अधिक सुदृढ़ ए व्यवहार अनुकूल और अधिक स्वतंत्र करने के लिए दूरदर्शिता पूर्ण प्रावधान किए गए हैं । इंटीग्रेटेड यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट सिस्टम से एक केंद्रीकृत और अधिक जटिल व्यवस्था पैदा होगी ए जो नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुसार नहीं होगी । 

अभाविप ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि इस प्रणाली को वापस लिया जाए। जिससे की छात्रों को किसी तरह की कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े।