NEWS: “नीमच में पत्रकारिता का महामंच: ‘कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया’ – मुकेश सहारिया का बड़ा बयान, ‘मंत्री-अधिकारी से भी ज्यादा ताकतवर जनता और पत्रकार’ – कपिल सिंह चौहान का दमदार संदेश!, पढ़े खबर

NEWS: “नीमच में पत्रकारिता का महामंच: ‘कभी किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया’ – मुकेश सहारिया का बड़ा बयान, ‘मंत्री-अधिकारी से भी ज्यादा ताकतवर जनता और पत्रकार’ – कपिल सिंह चौहान का दमदार संदेश!, पढ़े खबर

नीमच: कृति संस्था के “मेरा जीवन मेरे अनुभव” कार्यक्रम में पत्रकारिता, संघर्ष और जनहित की ताकत पर जोरदार विचार सामने आए। मंच से वक्ताओं ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए पत्रकारिता की जिम्मेदारी और शक्ति को रेखांकित किया।

मुकेश सहारिया का बेबाक बयान

पत्रिका के ब्यूरो चीफ मुकेश सहारिया ने साफ कहा—

 “मैंने कभी ऐसी पत्रकारिता नहीं की जिससे किसी का नुकसान हो।”उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण सफर को याद करते हुए बताया कि उनकी पत्रकारिता की शुरुआत छोटे अखबारों से हुई और धीरे-धीरे बड़े संस्थानों तक पहुंची।प्रभातकिरण और अमृत मंथन से शुरुआत भास्कर में रतलाम और नीमच में महत्वपूर्ण भूमिका राज एक्सप्रेस और फिर 2011 से पत्रिका से जुड़े उन्होंने कहा कि पत्रकारिता में तकनीक का सफर क्रेडल मशीन से लेकर AI तक देखा है, लेकिन ईमानदारी और निडरता हमेशा सबसे बड़ी ताकत रही।

कपिल सिंह चौहान का जोरदार संदेश

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकार कपिल सिंह चौहान ने कहा— “आम आदमी और पत्रकार, किसी भी मंत्री या अधिकारी से ज्यादा ताकतवर होते हैं।” उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत नाटक और फिल्मी फोटोग्राफी से की, मुंबई में बड़े नामों के साथ काम किया, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण नीमच लौटना पड़ा। नीमच मेडिकल कॉलेज आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि— “जब जनता और पत्रकार एक हो जाते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है।”

 कार्यक्रम की खास झलकियां

कार्यक्रम की अध्यक्षता राधेश्याम पाटीदार ने की संस्था अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने स्वागत भाषण दिया मंच संचालन डॉ. अक्षय पुरोहित और सविता चौधरी ने किया

सरस्वती वंदना पुनीता निगम द्वारा प्रस्तुत

इस मौके पर नारद जयंती, विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस और हिंदी पत्रकारिता दिवस का महत्व भी बताया गया, जब 1826 में हिंदी के पहले समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन हुआ था।

सार

यह कार्यक्रम सिर्फ अनुभव साझा करने का मंच नहीं रहा, बल्कि यह संदेश देने वाला मंच बना कि— ईमानदार पत्रकारिता आज भी समाज को बदलने की ताकत रखती है।