BIG NEWS: मजदूरों का फूटा गुस्सा!” मई दिवस पर नीमच में सीटू का बड़ा प्रदर्शन, सरकारी नीतियों के खिलाफ उठी बुलंद आवाज, गांधी वाटिका बनी संघर्ष का मैदान

BIG NEWS: मजदूरों का फूटा गुस्सा!” मई दिवस पर नीमच में सीटू का बड़ा प्रदर्शन, सरकारी नीतियों के खिलाफ उठी बुलंद आवाज, गांधी वाटिका बनी संघर्ष का मैदान

नीमच। अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर 1 मई 2026 को सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू) द्वारा नीमच के गांधी वाटिका में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रमिकों और ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों ने भाग लिया और मौजूदा सरकारी नीतियों के खिलाफ असंतोष जाहिर किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कामरेड विजय बैरागी ने मई दिवस के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसकी शुरुआत 1886 में अमेरिका के शिकागो शहर में मजदूरों द्वारा 8 घंटे कार्यदिवस की मांग को लेकर किए गए ऐतिहासिक आंदोलन से हुई थी। उन्होंने कहा कि उस संघर्ष में कई मजदूर शहीद हुए, जिनकी कुर्बानी को आज भी दुनिया भर के श्रमिक याद करते हैं।

कामरेड निरंजन गुप्ता राही ने बताया कि 1889 में पेरिस में हुए अंतरराष्ट्रीय कम्युनिस्ट आंदोलन के आह्वान पर 1890 से 1 मई को विश्वभर में मजदूर दिवस मनाया जाने लगा। यह दिन शोषण, उत्पीड़न और असमानता के खिलाफ एकजुटता का प्रतीक है।

सामाजिक कार्यकर्ता कामरेड किशोर जेवरिया ने कहा कि भारतीय श्रमिक आंदोलन पूंजीवादी शोषण, साम्राज्यवाद और सामाजिक विभाजन की नीतियों के खिलाफ संघर्ष कर रहा है। उन्होंने श्रमिकों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ने का आह्वान किया।

कामरेड सुनील शर्मा ने कहा कि 2026 का मई दिवस अभूतपूर्व परिस्थितियों में मनाया जा रहा है, जहां देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों का असंतोष सड़कों पर दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि मजदूरों की मुख्य मांगें न्यूनतम वेतन में वृद्धि और 8 घंटे कार्यदिवस लागू करना है।

नितेश यादव ने आरोप लगाया कि विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक आंदोलनों को दबाने के लिए पुलिस बल का उपयोग किया गया, जिसमें कई मजदूर घायल हुए और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां भी हुईं।

कामरेड शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि श्रमिक असंतोष लगातार बढ़ रहा है और इसे दबाने के बजाय समाधान की आवश्यकता है। वहीं बीएसएनएल के कैलाश चंद्र सेन ने वैश्विक परिस्थितियों और बढ़ती महंगाई को श्रमिकों की समस्याओं का बड़ा कारण बताया।

औद्योगिक मजदूर एकता यूनियन के मुकेश बाबा ने कहा कि कम वेतन और बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों के लिए परिवार का पालन-पोषण करना बेहद कठिन हो गया है। वहीं नरेंद्र कमल वाले ने मजदूरों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार की निंदा की।

आशा कार्यकर्ता सुनीता धाकड़ ने श्रम कानूनों में किए गए बदलावों पर चिंता जताते हुए कहा कि नए लेबर कोड से मजदूरों के अधिकार कमजोर होंगे और ठेका प्रणाली को बढ़ावा मिलेगा।

युवा किसान नेता राधेश्याम नागदा ने कहा कि मजदूर और किसान एकता ही भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बनेगी। उन्होंने कहा कि जैसे कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन सफल हुआ, वैसे ही श्रमिक आंदोलन भी अपने अधिकारों के लिए निर्णायक साबित होगा।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित साथियों ने श्रमिक एकता और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर अरिजीत यादव, जितेंद्र वर्मा, चिंटू मित्तल, दीपक भट्ट, नीरज जोशी, मनोहर वर्मा सहित कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।