NEWS: 'खाद के नाम पर किसानों से जबरन टैगिंग बंद करे सरकार', किसान नेता श्यामलाल जोकचंद की चेतावनी—'अन्नदाता का शोषण हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन', पढ़े खबर

यूरिया के लिए डीएपी-एसएसपी खरीदने की कथित मजबूरी पर उठाए सवाल, बोले—55 किमी दूर भेजे जा रहे किसान, खेती पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

NEWS: 'खाद के नाम पर किसानों से जबरन टैगिंग बंद करे सरकार', किसान नेता श्यामलाल जोकचंद की चेतावनी—'अन्नदाता का शोषण हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन', पढ़े खबर

पिपलिया स्टेशन (निप्र)। मल्हारगढ़ विधानसभा क्षेत्र के किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने खरीफ सीजन में किसानों को खाद वितरण की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार से तत्काल सुधार की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने के बजाय जबरन टैगिंग के नाम पर डीएपी और एसएसपी खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह व्यवस्था जल्द समाप्त नहीं हुई तो किसान संगठन आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

जोकचंद ने कहा कि प्रदेश के कई जिलों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि जिन किसानों को केवल यूरिया की आवश्यकता है, उन्हें पहले डीएपी या एसएसपी खरीदने की शर्त पूरी करने के बाद ही यूरिया उपलब्ध कराया जा रहा है। कई मामलों में ई-टोकन जारी होने पर पहले दो या चार बोरी डीएपी खरीदने का टोकन दिया जा रहा है, जबकि संबंधित किसान की फसल को उसकी आवश्यकता ही नहीं होती। उन्होंने इसे किसानों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने वाली व्यवस्था बताया।

उन्होंने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए लागू की गई ई-टोकन प्रणाली अब परेशानी का कारण बन गई है। किसान घंटों तक पोर्टल पर टोकन का इंतजार करते हैं और टोकन मिलने पर भी ऐसी शर्तें सामने आती हैं जिनका खेती की वास्तविक जरूरतों से कोई संबंध नहीं होता।

किसान नेता ने यह भी आरोप लगाया कि कई किसानों के लिए खाद वितरण केंद्र उनके गांव से 30 से 55 किलोमीटर दूर निर्धारित किए जा रहे हैं। एक-दो बोरी खाद लेने के लिए किसानों को पूरा दिन खराब करना पड़ता है और अतिरिक्त परिवहन खर्च भी उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह व्यवस्था सबसे अधिक परेशानी का कारण बन रही है।

जोकचंद ने कहा कि खेती की लागत पहले ही लगातार बढ़ रही है। डीजल, बिजली, बीज, मजदूरी, सिंचाई और कीटनाशकों के बढ़ते खर्च के बीच किसानों पर ऐसी खाद खरीदने का दबाव बनाना, जिसकी उन्हें आवश्यकता नहीं है, पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने कहा कि "किसान ग्राहक नहीं, बल्कि देश का अन्नदाता है और उसके साथ इस प्रकार का व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।"उन्होंने सरकार से मांग की कि यदि प्रदेश में यूरिया या अन्य उर्वरकों की कमी है तो उसकी वास्तविक स्थिति किसानों के सामने पारदर्शी तरीके से रखी जाए। कृत्रिम व्यवस्थाएं बनाकर किसानों को भ्रमित करने के बजाय वितरण प्रणाली को पारदर्शी और सरल बनाया जाए।

किसान नेता की प्रमुख मांगें

खाद की अनिवार्य टैगिंग व्यवस्था तत्काल समाप्त की जाए।

किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार बिना किसी शर्त के यूरिया, डीएपी, एसएसपी एवं अन्य उर्वरक उपलब्ध कराए जाएं।

सभी सहकारी समितियों एवं वितरण केंद्रों पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाए।

किसानों के नजदीक खाद वितरण केंद्र बनाए जाएं, ताकि उन्हें लंबी दूरी तय न करनी पड़े।

अंत में श्यामलाल जोकचंद ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसानों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ और जबरन टैगिंग की व्यवस्था समाप्त नहीं की गई, तो किसान संगठन प्रदेशभर में आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि अन्नदाता के अधिकारों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।