BREAKING NEWS: मध्यप्रदेश के खजाने को बड़ी राहत, सरदार सरोवर परियोजना पर ऐतिहासिक समझौता, तीन दशक पुराने पुनर्वास विवाद का हुआ अंत, हजारों करोड़ रुपये का संभावित वित्तीय बोझ टला, पढ़े खबर
भोपाल। करीब तीन दशक से सरदार सरोवर परियोजना के पुनर्वास एवं पुनर्बसाहट व्यय को लेकर मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच चला आ रहा विवाद आखिरकार खत्म हो गया। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की उपस्थिति में हुई उच्चस्तरीय बैठक में चारों राज्यों ने सर्वसम्मति से ऐतिहासिक समझौते पर सहमति जताई। इस फैसले से मध्यप्रदेश को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। अब प्रदेश को लगभग 1500 करोड़ रुपये के संभावित भुगतान के बजाय केवल 231.80 करोड़ रुपये ही देने होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस निर्णय को सहकारी संघवाद की बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच समन्वय, संवाद और विश्वास के माध्यम से वर्षों पुराने जटिल विवाद का समाधान संभव हुआ है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय प्रदेश के हित में ऐतिहासिक साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने बताया कि फरवरी 2026 में भारत के अटॉर्नी जनरल की राय के अनुसार पुनर्वास व्यय में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत तय की गई थी, जिसके आधार पर प्रदेश को गुजरात को करीब 1500 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ता। लेकिन दिल्ली में हुई बैठक में सभी राज्यों की सहमति से मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी घटाकर 16.17 प्रतिशत कर दी गई, जिससे भुगतान की राशि घटकर केवल 231.80 करोड़ रुपये रह गई।

समझौते के तहत गुजरात की हिस्सेदारी 50.57 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दी गई, जबकि महाराष्ट्र की हिस्सेदारी 15.15 प्रतिशत से घटाकर 7.66 प्रतिशत और राजस्थान की हिस्सेदारी 2.31 प्रतिशत से घटाकर 1.17 प्रतिशत निर्धारित की गई। इसके तहत गुजरात को सहभागी राज्यों से कुल 553.43 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरदार सरोवर परियोजना मध्यप्रदेश के विकास की आधारशिला बन चुकी है। प्रदेश को इस परियोजना से उत्पादित कुल विद्युत का 57 प्रतिशत हिस्सा मिलता है और अब तक लगभग 3900 करोड़ यूनिट बिजली औसतन 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से प्राप्त हो चुकी है। इसके साथ ही लगभग 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिल रही है तथा जबलपुर, कटनी, देवास, उज्जैन, इंदौर, धार सहित अनेक शहरों और पीथमपुर, देवास एवं विक्रम उद्योगपुरी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों तक नर्मदा का पानी पहुंच रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह समझौता केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि राज्यों के बीच सहयोग, विश्वास और सहकारी संघवाद की भावना को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक निर्णय है, जो आने वाले वर्षों में विकास और जल सुरक्षा को नई गति देगा।