BIG NEWS: सावधान! डिजिटल अरेस्ट का नया मकड़जाल, एक कॉल और 15 दिनों का खौफ,नीमच सायबर सेल ने नीमच के इस बुजुर्ग दंपत्ति की चंद मिनट में बचाई जीवनभर की कमाई,क्या पूरा मामला,पढ़े ये खबर
सावधान! डिजिटल अरेस्ट का नया मकड़जाल, एक कॉल और 15 दिनों का खौफ
नीमच। जिले की सायबर सेल ने मुस्तैदी दिखाते हुए एक बुजुर्ग दंपत्ति को बड़ी ठगी का शिकार होने से बचा लिया। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराकर ठगों ने दंपत्ति की जीवनभर की पूंजी 60 लाख रुपये की एफडी तुड़वा ली थी, लेकिन पुलिस ने सही समय पर पहुंचकर इस बड़ी वारदात को विफल कर दिया।
जानकारी के मुताबिक विकास नगर क्षेत्र के रहने वाले एक सेवानिवृत्त बुजुर्ग दंपत्ति को ठगों ने पिछले 15 दिनों से मानसिक रूप से बंधक बना रखा था। ठगों ने खुद को दिल्ली का पुलिस कमिश्नर बताकर व्हाट्सएप कॉल किया और दावा किया कि उनका नाम एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में आया है। डराने के लिए उन्हें बच्चों को जेल भेजने की धमकी दी गई और किसी को भी इस बारे में न बताने के लिए मजबूर किया गया।
इतना ही नहीं ठगों के झांसे में आकर दंपत्ति अपनी सारी एफडी तुड़वाकर पैसा एक अन्य खाते में डालने वाले थे। जब उन्होंने इस बारे में अपनी बाहर रह रही बेटी से घुमा-फिराकर बात की, तो उसे शक हुआ। बेटी ने तत्काल इंदौर क्राइम ब्रांच के उप निरीक्षक शिवम ठक्कर से संपर्क किया,जिन्होंने बिना देरी किए नीमच सायबर सेल प्रभारी प्रदीप शिंदे को सूचना दी। ततपश्चात नीमच एसपी अंकित जायसवाल के निर्देशन में सायबर टीम मात्र 7 मिनट में बुजुर्गों के घर पहुंच गई। शुरुआत में दंपत्ति इतने डरे हुए थे कि वे पुलिस को कुछ भी बताने को तैयार नहीं थे। पुलिस टीम ने करीब 2 घंटे तक मनोवैज्ञानिक तरीके से उनकी काउंसलिंग की और उन्हें वीडियो दिखाकर समझाया कि डिजिटल अरेस्ट पूरी तरह फर्जीवाड़ा है।
साथ ही एसपी अंकित जायसवाल ने दंपत्ति से मुलाकात कर उनका ढांढस बंधाया। उन्होंने आमजन से अपील की है कि आमजन अपील की कि से कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कुछ नहीं हैं, नकली वर्दी से न डरें। ठग आजकल ईडी, सीबीआई या पुलिस की नकली वर्दी पहनकर वीडियो कॉल करते हैं। कोई भी एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती जांच के नाम पर पैसा ट्रांसफर करने को कहना ठगी की पहली निशानी है। किसी भी संदिग्ध कॉल आने पर डरे नहीं, तत्काल 1930 या नजदीकी थाने में सूचना दें।
सराहनीय भूमिका-
इस ऑपरेशन को सफल बनाने में सायबर सेल प्रभारी प्रदीप शिंदे, प्रआ. आदित्य गौड़, आर. लखन प्रताप सिंह, कुलदीप सिंह, सोनेन्द्र राठौर राहुल सौलंकी और इंदौर क्राइम ब्रांच के उप निरीक्षक शिवम ठक्कर की मुख्य भूमिका रही।