BIG NEWS : जावद में प्रशासनिक कार्रवाई से उबाल, राजपूत-ब्राह्मण समाज में भारी रोष,ग्राम कास्या में मंदिर सहित पुश्तैनी मकान तोड़ने के आदेश के खिलाफ समाज सड़क पर,ज्ञापन सोप दी चेतावनी भी,पढ़े ये खबर

जावद में प्रशासनिक कार्रवाई से उबाल, राजपूत-ब्राह्मण समाज में भारी रोष,ग्राम कास्या में मंदिर सहित पुश्तैनी मकान तोड़ने के आदेश के खिलाफ

BIG NEWS : जावद में प्रशासनिक कार्रवाई से उबाल, राजपूत-ब्राह्मण समाज में भारी रोष,ग्राम कास्या में मंदिर सहित पुश्तैनी मकान तोड़ने के आदेश के खिलाफ समाज सड़क पर,ज्ञापन सोप दी चेतावनी भी,पढ़े ये खबर

नीमच जिले की जावद तहसील के ग्राम कास्या में प्रस्तावित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राजपूत एवं ब्राह्मण समाज के लोगों ने प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।

ज्ञापन में बताया गया कि ग्राम कास्या निवासी सचिन पिता मोहनलाल पाराशर का परिवार पिछले करीब 70 वर्षों से अपने पुश्तैनी मकान में निवासरत है। इस मकान में भगवान खाटूश्यामजी का मंदिर भी स्थापित है, जहां वर्षों से पूजा-अर्चना होती आ रही है। समाजजनों का कहना है कि यह केवल एक मकान नहीं बल्कि आस्था का केंद्र भी है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ग्राम कास्या के अधिकांश मकान एक ही सर्वे नंबर (11, रकबा 41.087 हेक्टेयर) में बने हुए हैं और सभी निवासी वर्षों से वहीं रह रहे हैं। ऐसे में केवल एक परिवार को अतिक्रमणकारी बताकर कार्रवाई करना संदेह पैदा करता है।

समाज ने यह भी बताया कि शासन की योजनाओं के तहत इसी मकान पर पूर्व में शौचालय निर्माण के लिए अनुदान भी दिया गया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन स्वयं इस आवास को मान्यता देता रहा है। इसके बावजूद अब अचानक अतिक्रमण का मामला बनाकर बेदखली का आदेश जारी करना विरोधाभासी और अन्यायपूर्ण है।

आरोप है कि तहसीलदार जावद द्वारा बिना समुचित सुनवाई और वास्तविक स्थिति की जांच के, प्रकरण क्रमांक 0077/अ-68/2025-26 के तहत एकतरफा कार्रवाई करते हुए मकान को जमींदोज करने का आदेश जारी किया गया है। समाजजनों ने इसे साजिशपूर्ण कार्रवाई बताते हुए कहा कि एक गरीब ब्राह्मण परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।

ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि इस कार्रवाई को तुरंत नहीं रोका गया तो क्षेत्र में उग्र आंदोलन की स्थिति बन सकती है, जिससे कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है। समाज ने प्रशासन से मांग की है कि उक्त आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।