NEWS: उड़ीसा के पुरी में श्रमिक क्रांति का शंखनाद, इन विभिन्न मांगों को लेकर दी आंदोलन की चेतावनी, तो नीमच को भी मिला प्रतिनिधित्व,पढ़े खबर
उड़ीसा के पुरी में श्रमिक क्रांति का शंखनाद, इन विभिन्न मांगों को लेकर दी आंदोलन की चेतावनी, तो नीमच को भी मिला प्रतिनिधित्व
नीमच। ओडिशा के पुरी में आयोजित भारतीय मजदूर संघ के तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय अखिल भारतीय अधिवेशन में देश के श्रम क्षेत्र की दशा और दिशा बदलने के लिए ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किए गए।
नीमच का गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व-
इस अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय समागम में नीमच जिले का प्रतिनिधित्व जिला अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्या स्नेह लता सिंह राजावत ने किया। उन्होंने अधिवेशन के दौरान स्थानीय श्रमिकों की समस्याओं और उनके अधिकारों की आवाज को राष्ट्रीय पटल पर मजबूती से रखा। श्रीमती राजावत ने संगठन के आगामी लक्ष्यों और 'अन्त्योदय' के संकल्प को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए जिला स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प दोहराया।
श्रम कानूनों का हो सार्वभौमीकरण और ठेका प्रथा पर प्रहार-
अधिवेशन में मुख्य रूप से यह मांग उठाई गई कि श्रम कानून देश के अंतिम श्रमिक तक बिना किसी भेदभाव के लागू होने चाहिए। संघ ने कहा कि देश का 93 प्रतिशत कार्यबल असंगठित क्षेत्र में है, जो आज भी कानूनी सुरक्षा से वंचित है। 'अन्त्योदय' के संकल्प को सिद्ध करने के लिए न्यूनतम वेतन के स्थान पर 'जीवन-निर्वाह वेतन' देने की नीति बनाने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही मांग की गई कि,किसी भी संस्थान में यदि 1 भी श्रमिक कार्यरत है, तो उस पर श्रम कानून लागू होने चाहिए। 2 वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले प्रत्येक अस्थायी श्रमिक को नियमित (स्थायी) किया जाए।समान कार्य के लिए समान वेतन' के सिद्धांत को सख्ती से लागू किया जाए।
आंगनबाड़ी कर्मियों को मिले राजकीय कर्मचारी का सम्मान-
देश की 24,00,000आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की स्थिति पर चर्चा करते हुए संघ ने मांग की कि उन्हें 'मानदेय' के बजाय पूर्ण 'वेतन' दिया जाए। उच्चतम न्यायालय के निर्णयों का हवाला देते हुए संघ ने कहा कि आंगनबाड़ी कर्मियों को 'राजकीय कर्मचारी' घोषित किया जाए और उन्हें भविष्य निधि एवं सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिले। साथ ही 31 मार्च 1985 से सामान्य भर्ती पर लगे प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग भी की गई।
आंदोलन की दी चेतावनी-
अधिवेशन के अंतिम दिन भारतीय मजदूर संघ ने केंद्र और राज्य सरकारों को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि यदि श्रमिकों के अधिकारों का 'सार्वभौमीकरण' नहीं किया गया, तो देश भर के औद्योगिक संस्थानों और जिला मुख्यालयों से लेकर दिल्ली तक बड़ा विरोध प्रदर्शन और देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। संघ का मानना है कि 2047 तक विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का श्रमिक समृद्ध और शोषण मुक्त होगा।