NEWS : चीताखेडा में श्रीमद् भागवत कथा से भक्तिमय हुवा पूरा गांव,आज जब हुवा श्री कृष्ण का जन्म,तो कुछ यु झूम उठे लोग,की कान्हा की भक्ति में खो बैठे अपनी सुधबुद,पं कन्हैयादास वैष्णव के मुखारविंद से हो रही संगीतमय भागवत,पढ़े ये खबर को
चीताखेडा में श्रीमद् भागवत कथा से भक्तिमय हुवा पूरा गांव,आज जब हुवा श्री कृष्ण का जन्म,तो कुछ यु झूम उठे लोग,की कान्हा की भक्ति में खो बैठे अपनी सुधबुद
रिपोर्ट-आज़ाद मंसूरी
चीताखेड़ा -21 दिसंबर। नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की........ ,हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की....... ,खुल गये सारे ताले करामात हो गई......., जय श्री राधे...... जय श्री कृष्ण के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान श्री कृष्ण जन्म प्रसंग के दौरान जैसे ही वासुदेव भगवान श्री कृष्ण (यक्ष परमार)को पालने में वासुदेव (बालमुकुंद मिश्रा) लेकर आए तो पूरा पंडाल में जयकारे लगाते हुए सभी ने भगवान के जन्म पर एक दूसरे को बधाई दी । पुष्प वर्षा की और उसके बाद माखन -मिश्री और पंजेरी का वितरण किया गया। पंडित कन्हैयादास वैष्णव ने कथा में सुनाया कि त्रिगुणात्मक प्रकृति के रूप में श्री कृष्ण की तीन माताएं हैं। रजोगुणी प्रकृति के रूप में जन्मदात्री देवकी मां जो सांसारिक माया ग्रह में केद है, सतगुणी प्रकृति रूप मां यशोदा है, जिनके वात्सल्य रूपी प्रेम रस को पीकर श्री कृष्ण बड़े हुए। इसके विपरीत एक गौर तमस रूपा प्रकृति भी शिशु भक्षक पूतना मां है, जिसे आत्म तत्व का प्रस्फुटित अंकुरण नहीं सुहाता और वह वात्सल्य का अमृत पिलाने के स्थान पर विषपान कराती है। यहां यह संदेश दिया जाता है कि प्रकृति का तमस तत्व चेतन तत्व के विकास को रोकने में असमर्थ हैं।

चीताखेडा गांव के पुराना हायर सेकंडरी स्कूल परिसर में भव्य कथा पंडाल में कथा मर्मज्ञ पंडित श्री कन्हैयादास वैष्णव के मुखारविंद से संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा का वाचन किया जा रहा है। रविवार को कथा के दौरान पंडित कन्हैयादास वैष्णव ने श्री कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि कृष्ण ने काल को भी जीत लिया था। वरना काल तो उनका जन्म जहां हुआ था वह काल कोठरी थी और उनके मामा कंस ने उनके नहीं पैदा होने और अगर पैदा हो भी जाए तो फिर मार देने की पुख्ता व्यवस्था करके रखी थी। लेकिन देखो, कृष्ण पैदा भी हुए और बार-बार आने वाली मृत्यु को उन्होंने भगाया भी। श्री कृष्ण की जीवंतता और खिलंदडिपन के कारण ही कृष्ण को ईश्वर का दर्जा मिला। श्री कृष्ण का जीवन हर क्षण हमको यही प्रेरणा देता है कि जीवन को अनासक्त भाव से जियो। पंडाल मे उड़ रहा था तो कृष्ण जन्म की खुशी का रंग और बट रहा था तो पंडित श्री कन्हैयादास वैष्णव का अमृतवाणी का प्रसाद जिसे पाकर सब धन्य हो गए। गुलाल, हल्दी, चंदन और माखन मिश्री के साथ कथा के चौथे दिन चीताखेड़ा में चल रहे भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन खूब गोंते लगा रहे हैं।

संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा मर्मज्ञ पंडित कन्हैयादास वैष्णव ने भक्ति का प्रवाह करते हुए कथा के दौरान इस प्रसंग का संक्षिप्त वर्णन किया वामन देव का प्रकट्य,राजा परीक्षित, मुनि सुखदेव,कंस,राजा बलि, रामचरितमानस का वृतांत संक्षिप्त रूप से समझाया।
श्रीमद् भागवत ज्ञान गंगा में कृष्ण जन्मोत्सव पर विशाल पंडाल को आकर्षक ढंग से सजाया गया। भागवत कथा समिति के पदाधिकारियों ने क्षेत्र के समस्त धर्म प्रेमी जनता से अनुरोध किया कि अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करे। प्रतिदिन कथा प्रातः 11:30 से 3:30 तक प्रवाहित की जा रही है।