BREAKING NEWS: “किसकी थी ड्यूटी?” के खेल में फंसी जिंदगी… जीरन अस्पताल में 2 घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार करते रहे मरीज, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, पढ़े खबर

BREAKING NEWS: “किसकी थी ड्यूटी?” के खेल में फंसी जिंदगी… जीरन अस्पताल में 2 घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार करते रहे मरीज, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, पढ़े खबर

जीरन (नीमच)। तहसील मुख्यालय जीरन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मंगलवार सुबह उस समय अव्यवस्थाओं का प्रतीक बन गया, जब अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचे मरीज घंटों तक डॉक्टरों का इंतजार करते रहे। सुबह 9 बजे से अस्पताल की ओपीडी में 25 से अधिक मरीज लाइन में खड़े रहे, लेकिन 11 बजे तक कोई जिम्मेदार डॉक्टर अस्पताल नहीं पहुंचा। इस दौरान बुजुर्ग, महिलाएं और बीमार मरीज दर्द से कराहते नजर आए, जिससे अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया।

मरीजों का फूटा गुस्सा, जनप्रतिनिधि पहुंचे अस्पताल

लगातार इंतजार के बाद मरीजों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। सूचना मिलते ही पार्षद प्रतिनिधि राजेश लक्षकार और करणी सेना अध्यक्ष विपुल सिंह सोनीगरा मौके पर पहुंचे। उन्होंने अस्पताल की स्थिति देखकर नाराजगी जताई और तत्काल बीएमओ डॉ. विजय भारती को फोन लगाकर पूरे मामले की जानकारी दी। जनप्रतिनिधियों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर जनता के साथ मजाक किया जा रहा है।

दबाव बढ़ा तो अस्पताल पहुंचे डॉक्टर

मामले ने तूल पकड़ा और जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद अस्पताल में डॉक्टरों की एंट्री शुरू हुई। सुबह करीब 10:50 बजे डॉ. आयुष और दो ट्रेनी डॉक्टर अस्पताल पहुंचे। इसके बाद करीब 11:10 बजे चिकित्सा अधिकारी डॉ. कमलेश माली अस्पताल पहुंचे। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि समय पर नहीं आने को लेकर जिम्मेदारी लेने के बजाय डॉक्टर एक-दूसरे पर ड्यूटी का ठीकरा फोड़ते नजर आए।

डॉ. आयुष ने कहा कि उनकी ड्यूटी नहीं थी, जबकि चिकित्सा अधिकारी डॉ. माली ने भी यही बात दोहराई। इस पर मौजूद लोगों ने सवाल उठाया कि यदि किसी की ड्यूटी नहीं थी, तो आखिर मरीजों की जिम्मेदारी कौन संभाल रहा था?

“5 दिन में सुधार नहीं हुआ तो होगा आंदोलन”

अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर पार्षद प्रतिनिधि राजेश लक्षकार और करणी सेना अध्यक्ष विपुल सिंह सोनीगरा ने चिकित्सा अधिकारी को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अस्पताल में डॉक्टरों की समय पर उपस्थिति, ओपीडी व्यवस्था और आपातकालीन सेवाएं अगले पांच दिनों में दुरुस्त नहीं हुईं तो जनता के साथ सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जीरन जैसे बड़े तहसील मुख्यालय पर स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

घटना के बाद एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां मरीज समय पर इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, वहीं डॉक्टरों की अनुपस्थिति लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर जीरन की जनता यूं ही बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के भरोसे छोड़ दी जाएगी।