बदलाव की बड़ी दस्तक: सदियों की बेड़ियां टूटीं! बांछड़ा समाज की महिलाएं आत्मनिर्भरता की राह पर,महिला दिवस पर 25 ‘हिम्मती बेटियों’ का भव्य सम्मान, पढ़े खबर
नीमच। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जन शौर्य सोशल वेलफेयर एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, नीमच एवं म.प्र. डे-ए-वाई राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त तत्वावधान में जनपद पंचायत सभाकक्ष में एक प्रेरणादायक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में नीमच जिले के बांछड़ा समुदाय के विभिन्न गांवों से आई स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के संदेश के साथ हुई। जन शौर्य संस्था के डायरेक्टर आकाश चौहान ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस महिलाओं के अधिकार, सम्मान और समान अवसरों की आवाज को मजबूत करने का दिन है। उन्होंने कहा कि बांछड़ा समुदाय की महिलाएं आज जिस साहस के साथ शिक्षा, स्वरोजगार और सम्मानजनक जीवन की ओर कदम बढ़ा रही हैं, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।

इस अवसर पर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक शंभू सिंह मइडा ने स्वयं सहायता समूहों की ताकत बताते हुए कहा कि महिलाएं हर माह मात्र 100 रुपये की बचत से अपने समूह को मजबूत बना सकती हैं। तीन माह बाद शासन की योजनाओं के माध्यम से ऋण प्राप्त कर छोटा उद्योग शुरू कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, तो वे अपने परिवार के साथ-साथ समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाती हैं।

कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, नीमच की अधिकारी सुश्री अंकित पांड्या ने भी महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि शासन द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं का लाभ लेकर महिलाएं अपने जीवन को नई दिशा दे सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से आगे बढ़कर योजनाओं का लाभ लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक पल तब आया जब स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर बनी 25 महिलाओं को प्रशंसा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। इन महिलाओं ने अपने साहस, मेहनत और संकल्प से यह साबित किया कि अवसर मिलने पर बदलाव निश्चित है।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे समाज में फैली कुरीतियों को पीछे छोड़कर शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की राह पर आगे बढ़ेंगी तथा अपने गांव की अन्य महिलाओं और बालिकाओं के लिए प्रेरणा बनेंगी। यह कार्यक्रम केवल महिला सशक्तिकरण का उत्सव ही नहीं रहा, बल्कि बांछड़ा समुदाय की महिलाओं में जागते आत्मविश्वास, साहस और बदलाव की नई उम्मीद का प्रतीक भी बना।