BIG NEWS : “मौत का रास्ता बना नीमच-चीता खेड़ा मार्ग: गड्ढों में गुम प्रशासन, रोज हादसों का डर”,कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी नहीं भरे गए गड्ढे, ग्रामीणों में भारी आक्रोश,बारिश से पहले सड़क सुधार नहीं हुआ तो बढ़ सकते हैं बड़े हादसे,पढ़े ये खबर

“मौत का रास्ता बना नीमच-चीता खेड़ा मार्ग: गड्ढों में गुम प्रशासन, रोज हादसों का डर”,कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी नहीं भरे गए गड्ढे, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

BIG NEWS : “मौत का रास्ता बना नीमच-चीता खेड़ा मार्ग: गड्ढों में गुम प्रशासन, रोज हादसों का डर”,कलेक्टर के निर्देशों के बाद भी नहीं भरे गए गड्ढे, ग्रामीणों में भारी आक्रोश,बारिश से पहले सड़क सुधार नहीं हुआ तो बढ़ सकते हैं बड़े हादसे,पढ़े ये खबर

नीमच, 17 अप्रैल।
नीमच से चीता खेड़ा को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग इन दिनों बदहाली की तस्वीर पेश कर रहा है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढों ने आमजन की परेशानी बढ़ा दी है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि इस मार्ग पर सफर करना किसी खतरे से कम नहीं रह गया। आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों और वाहन चालकों में डर का माहौल बना हुआ है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह मार्ग क्षेत्र के कई गांवों को जिला मुख्यालय से जोड़ता है। इसी सड़क से स्कूली बच्चे, किसान, व्यापारी और मरीज प्रतिदिन आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क की खस्ता हालत के कारण हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है। विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार विधायक नीमच के प्रयासों से इस मार्ग को हाईवे के रूप में स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया। लंबे समय से मरम्मत और निर्माण की मांग की जा रही है, बावजूद इसके जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देने तक सीमित नजर आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि सड़क अब विकास का नहीं बल्कि “मौत के रास्ते” का प्रतीक बन चुकी है।

हाल ही में कलेक्टर कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर हिमांशु चंद्रा ने संबंधित विभाग को तत्काल गड्ढे भरने और सड़क सुधार के निर्देश दिए थे। इसके बाद ग्राम दलपतपुर में आयोजित रात्रि चौपाल के दौरान भी ग्रामीणों ने सड़क की समस्या प्रमुखता से उठाई थी। उस दौरान कलेक्टर ने दोबारा अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर अब तक कोई सुधार दिखाई नहीं दिया।

गर्मी का मौसम समाप्ति की ओर है और जल्द ही बारिश का दौर शुरू होने वाला है। ऐसे में सड़क के गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटनाओं का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि यदि किसी की जान जाती है तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

इस मुद्दे को लेकर जिला कांग्रेस द्वारा पूर्व में धरना-प्रदर्शन कर चक्का जाम की चेतावनी भी दी गई थी, लेकिन उसका भी कोई ठोस असर दिखाई नहीं दिया। अब क्षेत्र की जनता जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से जल्द कार्रवाई की मांग कर रही है ताकि लोगों को इस जानलेवा मार्ग से राहत मिल सके।