*BIG NEWS: मध्यप्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण की ऐतिहासिक गूंज। प्रवास और पावक ने पूरा किया एक साल का अद्भुत और सफल सफर...! चीता प्रोजेक्ट को मिली बड़ी कामयाबी, सुरक्षित वातावरण में तेजी से ढलते चीते, वन विभाग की हाईटेक और चौकस निगरानी से बन रहा चीतों का नया आशियाना! पढ़े ये खबर

*BIG NEWS: मध्यप्रदेश के गांधी सागर अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण की ऐतिहासिक गूंज। प्रवास और पावक ने पूरा किया एक साल का अद्भुत और सफल सफर...! चीता प्रोजेक्ट को मिली बड़ी कामयाबी, सुरक्षित वातावरण में तेजी से ढलते चीते, वन विभाग की हाईटेक और चौकस निगरानी से बन रहा चीतों का नया आशियाना! पढ़े ये खबर

रिपोर्ट :- नरेंद्र राठौर 

पिपलियामंडी: मंदसौर जिले के गांधी सागर अभयारण्य में बसे दो चीतों प्रवास और पावक ने आज अपने प्रवास का एक वर्ष सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह अवसर वन विभाग के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए गर्व और उत्साह का विषय बन गया है।

दरअसल इन दोनों चीतों को चीता प्रोजेक्ट के तहत 20 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा गया था। एक साल के इस सफर में प्रवास और पावक ने नए वातावरण में खुद को अच्छी तरह ढालते हुए सकारात्मक संकेत दिए हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार दोनों चीतों की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। उनकी गतिविधियों, खान-पान और स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखी जा रही है। अत्याधुनिक ट्रैकिंग सिस्टम और विशेषज्ञ टीम की मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उन्हें किसी प्रकार का खतरा न हो और वे सुरक्षित वातावरण में अपना प्राकृतिक जीवन जी सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन चीतों का सफलतापूर्वक एक वर्ष पूरा करना प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह प्रयास न केवल जैव विविधता को मजबूत करेगा, बल्कि भविष्य में अन्य वन्यजीव पुनर्वास परियोजनाओं के लिए भी मार्ग प्रशस्त करेगा।

आने वाले समय में उम्मीद जताई जा रही है कि प्रवास और पावक न केवल यहां स्थायी रूप से बसेंगे, बल्कि इस क्षेत्र को चीतों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल आवास के रूप में स्थापित करेंगे। गांधी सागर अभयारण्य में चीतों का यह एक वर्ष का सफर मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की नई कहानी लिख रहा है।