NEEMUCH NEWS : 25 साल बाद फिर परीक्षा, शिक्षकों में उबाल, परीक्षा भी, पेंशन भी खत्म-प्रदेश में बढ़ा आक्रोश, 20 साल की सेवा के बाद भी अनिश्चित भविष्य, क्या सरकार लेगी बड़ा यू-टर्न, पढ़े ये खबर
25 साल बाद फिर परीक्षा,
नीमच | प्रदेश के शिक्षक वर्ग में इन दिनों भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। हाल ही में जारी आदेश के बाद 25 से 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को भी पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता ने विवाद खड़ा कर दिया है। इसे लेकर शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इसे उनके सम्मान और भविष्य के साथ अन्याय बताया है।

शिक्षकों का कहना है कि वे पहले ही निर्धारित योग्यता और पात्रता परीक्षा के आधार पर सेवा में आए हैं। ऐसे में वर्षों की सेवा के बाद पुनः परीक्षा का प्रावधान उनके अनुभव और समर्पण पर सवाल खड़ा करता है। इस निर्णय से शिक्षक वर्ग का मनोबल प्रभावित हो रहा है।
सेवा अवधि गणना पर भी विवाद
अध्यापक संवर्ग की एक और प्रमुख मांग सेवा अवधि की गणना को लेकर है। शिक्षकों का आरोप है कि उनकी वास्तविक नियुक्ति के बजाय वर्ष 2018 से सेवा अवधि मानी जा रही है, जबकि वे पिछले 20-22 वर्षों से निरंतर सेवा दे रहे हैं। इसे उन्होंने अन्यायपूर्ण बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की है।

पुरानी पेंशन बहाली की मांग तेज
इसके साथ ही शिक्षकों ने वर्तमान एनपीएस (नई पेंशन योजना) को भी उनके हितों के विरुद्ध बताया है। उनका कहना है कि यह बाजार आधारित व्यवस्था है, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पाती। ऐसे में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पुनः लागू करने की मांग तेज हो गई है।
सरकार से की गई ये बड़ी मांग
शिक्षक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि:
- पात्रता परीक्षा संबंधी आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए या स्थगित किया जाए
- सेवा अवधि की गणना नियुक्ति तिथि से की जाए
- पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू किया जाए
शिक्षकों ने यह भी आग्रह किया है कि मामले में उच्चतम न्यायालय में रिव्यू पिटीशन दायर की जाए या अन्य राज्यों की तरह निर्णय आने तक आदेश को रोका जाए।
अब देखना यह होगा कि सरकार इस बढ़ते असंतोष को कैसे संभालती है या आने वाले समय में यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप लेता है।
