BREKAKING NEWS: जीरन तालाब पर किसानों की सिंचाई की उम्मीदों पर लगा ब्रेक, अब बूंद-बूंद पानी रहेगा नगरवासियों के नाम, कमल भी नहीं होंगे बर्बाद, पढ़े खबर

BREKAKING NEWS: जीरन तालाब पर किसानों की सिंचाई की उम्मीदों पर लगा ब्रेक, अब बूंद-बूंद पानी रहेगा नगरवासियों के नाम, कमल भी नहीं होंगे बर्बाद, पढ़े खबर

जीरन। नगर की पेयजल व्यवस्था के प्रमुख आधार जीरन तालाब से सिंचाई के लिए नहरें खोलने को लेकर चल रहा विवाद आखिरकार थम गया है। नगरवासियों के विरोध और भविष्य में संभावित गंभीर जल संकट को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने इस वर्ष सिंचाई के लिए नहरें नहीं खोलने का निर्णय लिया है। तालाब में उपलब्ध पानी अब पूरी तरह नगर की पेयजल जरूरतों के लिए आरक्षित रहेगा। विभाग के इस फैसले से आगामी गर्मी में नगरवासियों को पेयजल संकट से बचाने की उम्मीद जगी है।

गौरतलब है कि विगत दिनों गणपति मंदिर परिसर में कृषकों की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें नगर परिषद जीरन के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) कपिलसिंह राणावत ने तालाब में घटते जलस्तर का हवाला देते हुए भविष्य में गंभीर पेयजल संकट की आशंका जताई थी। उन्होंने तालाब के पानी को केवल पेयजल आपूर्ति के लिए सुरक्षित रखने का आग्रह किया था।

इसी मामले में नगर के आरटीआई कार्यकर्ता विजय शर्मा और विनोद राठौर ने भी जल संसाधन विभाग के समक्ष विरोध दर्ज कराया था। उनका कहना था कि तालाब में पहले से ही नाममात्र का पानी शेष है। ऐसी स्थिति में नहरें खोलने पर सभी किसानों को पर्याप्त पानी मिलना संभव नहीं होगा। इससे किसानों के बीच विवाद और आपसी वैमनस्य की स्थिति पैदा हो सकती है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि कुछ लोग निजी स्वार्थ के चलते अधिकारियों पर दबाव बना रहे थे तथा कोरम के अभाव में भी नहर खोलने का प्रस्ताव पारित कराने का प्रयास किया जा रहा था।

लगातार बढ़ते विरोध और पेयजल की जरूरत को प्राथमिकता देते हुए आखिरकार जल संसाधन विभाग ने सिंचाई के लिए पानी नहीं छोड़ने का फैसला किया। इस निर्णय को नगरवासियों के हित में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 राष्ट्रीय पुष्प कमल को भी मिला जीवनदान, तालाब की सुंदरता बचने की उम्मीद

जीरन तालाब से नहरें खोलने की चर्चाओं के बीच केवल पेयजल ही नहीं, बल्कि तालाब की प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता पर भी खतरा मंडरा रहा था। तालाब में खिलने वाले राष्ट्रीय पुष्प कमल के अस्तित्व पर भी संकट खड़ा हो गया था। सेवानिवृत्त शिक्षक दयाराम खटक (धानुक) के वर्षों के अथक प्रयासों से जीरन तालाब में कमल के फूल खिलने लगे हैं, जो तालाब की सुंदरता में चार चांद लगाते हैं। यदि मौजूदा कम जलस्तर में नहरें खोल दी जातीं तो तालाब का पानी और तेजी से घटता तथा कमल के अस्तित्व पर संकट गहरा सकता था। अब विभाग के निर्णय से तालाब में बचे पानी और कमल की प्राकृतिक छटा को बचाए रखने की उम्मीद बढ़ गई है।

तालाब में महज 3 फीट पानी, सिंचाई के लिए एक पाण देना भी संभव नहीं

हिमांशु भाभोर, कार्यपालन यंत्री (ईई), जल संसाधन विभाग ने बताया कि जीरन तालाब में वर्तमान में महज 3 फीट पानी शेष है। इतने कम जलस्तर में सभी किसानों को एक पियत (पाण) देना भी संभव नहीं है। यदि पानी सिंचाई के लिए छोड़ दिया जाता तो आने वाले समय में नगर में गंभीर पेयजल संकट खड़ा हो सकता था। आमजन के हित और पेयजल व्यवस्था को सर्वोपरि रखते हुए इस वर्ष सिंचाई के लिए नहरें नहीं खोलने का निर्णय लिया गया है। तालाब का पानी पूरी तरह पेयजल के लिए आरक्षित रहेगा।