BREAKING NEWS: आखिर ऐसा क्या हुआ कि डिप्टी सीएम के लोकार्पण के कुछ ही देर बाद 1.77 करोड़ के निर्माण पर उठने लगे बड़े सवाल... 23 साल पुराने किसान शेड पर बने 32 कैश काउंटर अब क्यों बने चर्चा का विषय?, पढ़े नरेंद्र राठौर की खबर

BREAKING NEWS: आखिर ऐसा क्या हुआ कि डिप्टी सीएम के लोकार्पण के कुछ ही देर बाद 1.77 करोड़ के निर्माण पर उठने लगे बड़े सवाल... 23 साल पुराने किसान शेड पर बने 32 कैश काउंटर अब क्यों बने चर्चा का विषय?, पढ़े नरेंद्र राठौर की खबर

पिपलियामंडी। कृषि उपज मंडी पिपलियामंडी में रविवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं सांसद सुधीर गुप्ता ने करीब 1 करोड़ 77 लाख रुपए की लागत से निर्मित 32 नए कैश काउंटर (सैंड्री शॉप) का लोकार्पण किया। मंडी प्रशासन ने इसे किसानों और व्यापारियों को भुगतान संबंधी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, लेकिन लोकार्पण के साथ ही इस निर्माण को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार जिन कैश काउंटरों का लोकार्पण किया गया, वे करीब 23 वर्ष पुराने किसान शेड के ऊपर बनाए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह भवन वर्ष 2003 में बना था और समय के साथ इसकी स्थिति खराब हो गई थी। बरसात में पानी टपकना, प्लास्टर उखड़ना और कई जगहों पर सरिए दिखाई देना जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं। बताया जाता है कि कुछ वर्ष पहले इस भवन को हटाने का प्रस्ताव भी बना था, हालांकि बाद में इसकी मरम्मत कर उपयोग में लिया जाता रहा।

नई मंडी बनने के बावजूद पुराने परिसर में करोड़ों का निवेश क्यों?

इस निर्माण को लेकर दूसरा बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कृषि उपज मंडी का नया परिसर गुड़भेली बड़ी में विकसित किया जा रहा है और भविष्य में मंडी को वहीं स्थानांतरित किया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में पुराने परिसर में 1.77 करोड़ रुपए खर्च कर स्थायी कैश काउंटर बनाने की आवश्यकता को लेकर व्यापारी और नागरिक सवाल उठा रहे हैं।

पूर्व मंडी अध्यक्ष बंशीलाल पाटीदार एवं पूर्व उपाध्यक्ष कमलेश पटेल का कहना है कि यदि कुछ वर्षों में मंडी नए परिसर में स्थानांतरित होनी है, तो पुराने भवन पर इतनी बड़ी राशि खर्च करना वित्तीय दृष्टि से उचित है या नहीं, इसका जवाब जिम्मेदारों को देना चाहिए।

टोकन सिस्टम से आवंटन पर भी उठे सवाल

मंडी प्रशासन के अनुसार 32 कैश काउंटरों का आवंटन नीलामी के बजाय टोकन सिस्टम से किया गया है तथा प्रत्येक व्यापारी से लगभग 6.70 लाख रुपए जमा कराए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया को लेकर भी व्यापारी वर्ग में चर्चा है कि जब मंडी की दुकानों और व्यावसायिक परिसरों का आवंटन सामान्यतः नीलामी से होता है, तो इस मामले में टोकन प्रणाली क्यों अपनाई गई।

किसान नेता श्यामलाल जोकचंद ने आरोप लगाया कि पुराने भवनों पर रंग-रोगन कर नया दिखाकर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि भवन पहले जर्जर माना गया था तो निर्माण से पहले उसकी स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

मंडी सचिव ने क्या कहा?

मंडी सचिव जगदीशचंद भामर ने सभी सवालों का जवाब देते हुए कहा कि किसानों को भुगतान की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कैश काउंटर बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि निर्माण से पहले आरसीसी शेड का तकनीकी परीक्षण कराया गया था और सक्षम अधिकारियों से तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही निर्माण कार्य किया गया। उनका कहना है कि भवन पूरी तरह सुरक्षित है और नई मंडी विकसित होने में अभी समय लगेगा, इसलिए वर्तमान मंडी में यह सुविधा आवश्यक थी।

अब यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर प्रशासन निर्माण को पूरी तरह तकनीकी स्वीकृति के साथ सुरक्षित बता रहा है, वहीं दूसरी ओर भवन की स्थिति, टोकन सिस्टम से आवंटन और नई मंडी के निर्माण के बीच पुराने परिसर में किए गए करोड़ों के निवेश को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।