BIG NEWS: रेलवे के नए सर्वे से नागदा में मचा हड़कंप, 50 से ज्यादा ईंट-भट्ठे और छोटे किसानों की जमीन जद में, हजारों मजदूरों के रोजगार पर संकट, पढ़े खबर

BIG NEWS: रेलवे के नए सर्वे से नागदा में मचा हड़कंप, 50 से ज्यादा ईंट-भट्ठे और छोटे किसानों की जमीन जद में, हजारों मजदूरों के रोजगार पर संकट, पढ़े खबर

रिपोर्ट : बबलू यादव

नागदा। तीसरी और चौथी रेल लाइन के लिए रेलवे के नए सर्वे ने नागदा क्षेत्र में किसानों और ईंट-भट्ठा संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। गुरुवार को किए गए सर्वे में पुराने प्रस्ताव की तुलना में अधिक कृषि भूमि और 50 से ज्यादा ईंट-भट्ठों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। इससे किसानों के साथ उन हजारों श्रमिकों के सामने भी रोजगार का संकट खड़ा होने की आशंका है, जिनकी आजीविका इन भट्ठों से जुड़ी हुई है।

उमरनी फाटक से स्टेट हाईवे तक लगाए गए निशान

दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के तहत उमरनी फाटक से कोटा लाइन तक प्रस्तावित तीसरी-चौथी रेल लाइन के लिए रेलवे ने नया रूट सर्वे किया है। सर्वे के दौरान कृषि उपज मंडी के पहले गेट से रतन्याखेड़ी रोड, बेरछा रोड, जूना नागदा, गिंदवानिया होते हुए स्टेट हाईवे-17 पर गुरुकृपा ढाबे के समीप तक निशान लगाए गए हैं।

प्रभावित किसानों का कहना है कि नए प्रस्ताव में छोटे किसानों की जमीन अधिक संख्या में आने की आशंका है। दो से चार बीघा जैसी सीमित जमीन पर निर्भर परिवारों का यदि हिस्सा भी अधिग्रहण में चला जाता है तो उनकी खेती और आमदनी दोनों प्रभावित हो सकती हैं।

भट्ठों पर मंडराया कारोबार बंद होने का खतरा

नए सर्वे ने क्षेत्र के ईंट-भट्ठा संचालकों की परेशानी भी बढ़ा दी है। संचालकों के अनुसार प्रस्तावित मार्ग की जद में 50 से अधिक ईंट-भट्ठे आ रहे हैं। इनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर बड़ी संख्या में श्रमिक जुड़े हैं।

भट्ठा संचालकों का कहना है कि यदि प्रस्तावित रेल लाइन इसी मार्ग से गुजरती है तो वर्षों से चल रहे व्यवसाय प्रभावित होंगे। इसका सीधा असर उन मजदूर परिवारों पर पड़ेगा, जिनकी आय भट्ठों पर निर्भर है।

कृषि उपज मंडी के सामने भी चिंता

नवीन कृषि उपज मंडी के पहले गेट के आसपास रेलवे के निशान लगाए जाने की जानकारी के बाद किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि मंडी के पीछे प्रस्तावित रेलवे कर्व और संभावित ओवरब्रिज से वाहनों के आवागमन पर असर पड़ सकता है।

मंडी में कृषि उपज से भरे वाहनों के प्रवेश और निकासी के लिए अलग-अलग गेट बनाए गए हैं। ऐसे में यदि रेलवे का निर्माण कार्य पीछे वाले हिस्से में होता है तो मंडी तक पहुंचने वाले किसानों और परिवहन वाहनों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

बैठक में तय हुआ—18 अगस्त को एसडीएम कार्यालय पहुंचेंगे

नए सर्वे से प्रभावित किसानों और ईंट-भट्ठा संचालकों ने शुक्रवार को बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। बैठक में निर्णय लिया गया कि 18 अगस्त को दोपहर 12 बजे एसडीएम कार्यालय पहुंचकर रेल मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।

प्रतिनिधिमंडल रेलवे से नए सर्वे और प्रस्तावित मार्ग की जानकारी सार्वजनिक करने, प्रभावित पक्षों की आपत्तियां सुनने तथा कम से कम नुकसान वाला वैकल्पिक मार्ग तलाशने की मांग करेगा।

विकास के विरोध में नहीं, नुकसान कम करने की मांग

किसानों और भट्ठा संचालकों का कहना है कि रेल परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसका भार सीमित जमीन वाले किसानों और श्रमिकों पर नहीं डाला जाना चाहिए। उनका कहना है कि ऐसा रास्ता निकाला जाए, जिससे रेल लाइन का काम भी आगे बढ़े और खेती, रोजगार तथा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां भी अनावश्यक रूप से प्रभावित न हों।

बैठक में बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद

बैठक में मनोज राठी बारदान वाला, बसंत मालपानी, भवानीसिंह देवड़ा, लखन गुर्जर, श्याम प्रजापत, मनीष चपलोद, राजा कर्णावत, दिलीप कांठेड़, अनुज कांठेड़, नरेश जैन, रवि पाटीदार, दीपक चौधरी, मोहन चौधरी, जितेंद्र गांधी, जनक पुरोहित, शिवा माली, हितेश कांठेड़, मयंक चपलोद, लोकेंद्र हाड़ा, महेश प्रजापत, शुभकरण सिंह चौधरी, राजेश प्रजापत, संजय जायसवाल, डॉ. हुकुम सिंह गोयल, सुरेश चौधरी, विपिन प्रजापत, जीतू जाट, कालू चौधरी, लक्ष्मण चौधरी, कैलाश कुमावत, रघुनंदन शर्मा, प्रदीप मीणा, इरफान मेव, अमृतलाल मीणा, राकेश चौहान, ईश्वरलाल भांभी, अशोक चौधरी, चेतन चौधरी, नाहरसिंह पंवार, यशवंत पांचाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

अब निगाहें 18 अगस्त पर टिकी हैं। किसानों और भट्ठा संचालकों का कहना है कि प्रस्तावित ज्ञापन के जरिए वे रेलवे के सामने अपनी आपत्ति और रोजगार व जमीन बचाने की मांग मजबूती से रखेंगे।