BIG NEWS: रेलवे की तीसरी-चौथी लाइन के नए नक्शे पर बवाल! बड़े किसानों की जमीन बची, छोटे किसानों के खेत आए निशाने पर; बोले- जमीन गई तो सड़क पर उतरेंगे, पढ़े खबर

नागदा। रेलवे की प्रस्तावित तीसरी-चौथी लाइन के रूट में बदलाव अब किसानों के आक्रोश की वजह बनता जा रहा है। पुराने नक्शे को पीछे छोड़ रेलवे की टीम ने गुरुवार को नए सिरे से सर्वे और सीमांकन शुरू किया। खेतों में संभावित अधिग्रहण के निशान लगाए गए तो प्रभावित किसानों में चिंता के साथ विरोध के स्वर भी तेज हो गए।

पुराना रूट बदला, नए क्षेत्र में शुरू हुआ सीमांकन

किसानों का आरोप है कि पहले प्रस्तावित रूट में बड़े किसानों और कारोबारियों की जमीन प्रभावित हो रही थी। विरोध के बाद रूट में बदलाव किया गया और अब सर्वे ऐसे क्षेत्र में किया जा रहा है, जहां छोटे व सीमित भूमि वाले किसानों की जमीन आने की आशंका है। किसानों का कहना है कि प्रभावशाली लोगों की जमीन बचाकर छोटे किसानों की जमीन लेना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

एक-दो बीघा जमीन ही परिवार का सहारा

सीमांकन से प्रभावित होने वाले किसान हीरालाल चौधरी, राकेश चौहान, राधेश्याम चौहान, विक्रम प्रजापत, गोविंदलाल चौहान सहित अन्य किसानों ने बताया कि कई परिवारों के पास महज एक-दो बीघा जमीन है। खेती और मजदूरी के सहारे परिवारों का गुजारा होता है। ऐसे में यदि थोड़ी-सी जमीन भी अधिग्रहण में चली गई तो परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

कम गाइडलाइन से मुआवजा घटने की भी चिंता

किसानों ने नए सर्वे क्षेत्र की जमीनों की गाइडलाइन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि इस क्षेत्र की जमीन अधिग्रहित की जाती है तो कम गाइडलाइन के चलते पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने की आशंका है। किसानों के सामने चिंता यह है कि जमीन जाने के साथ कहीं मुआवजा भी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला तो उनकी स्थिति और मुश्किल हो जाएगी।

रूट बदलने के पीछे राजनीतिक दबाव का आरोप

रेलवे लाइन के नक्शे में बदलाव को लेकर अब राजनीतिक सवाल भी उठने लगे हैं। किसानों का आरोप है कि पुराने रूट का विरोध करने वाले प्रभावशाली लोगों की जमीन बचाने के लिए दबाव बनाया गया और नए रूट की मार छोटे किसानों पर पड़ रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अब किसानों का सवाल है कि यदि प्रभावशाली किसानों की जमीन बचाने के लिए रूट बदला जा सकता है तो छोटे किसानों की जमीन बचाने के लिए आवाज कौन उठाएगा?

गुपचुप सीमांकन पर किसानों ने मांगा जवाब

किसानों ने रेलवे और प्रशासन की कार्रवाई की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि रेलवे ने प्रस्तावित रूट में बदलाव किया है तो प्रभावित किसानों और स्थानीय प्रशासन को इसकी स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए। अचानक खेतों में नए निशान लगाए जाने से किसानों में भ्रम और भय की स्थिति बन गई है।

किसानों की मांग है कि रेलवे स्पष्ट करे कि रूट क्यों बदला गया, किन आधारों पर नया नक्शा तैयार हुआ और कितने किसानों की कितनी जमीन प्रभावित होगी।

ज्ञापन के बाद आंदोलन की चेतावनी

रतन्याखेड़ी के किसान लाला पंवार ने आरोप लगाया कि पुराने प्लान की तुलना में नए रूट में अधिक किसानों के प्रभावित होने की स्थिति बन रही है। उनका कहना है कि छुट्टियां समाप्त होने के बाद किसान एसडीएम कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन देंगे। यदि इसके बाद भी अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ाई गई तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

रतन्याखेड़ी रोड पर जटिया कॉलोनी के आगे लगाए गए नए निशान फिलहाल रेलवे के सर्वे और सीमांकन का हिस्सा हैं, लेकिन किसानों के लिए ये निशान अब आक्रोश और संभावित आंदोलन की आहट बन गए हैं।

अब मुद्दा सिर्फ रेलवे लाइन के रूट का नहीं, बल्कि यह भी है कि विकास की कीमत आखिर किसकी जमीन से चुकाई जाएगी?