BIG NEWS: 7.8% GDP के दावे पर कांग्रेस का बड़ा हमला: मधु बंसल बोलीं—‘आंकड़ों की बाजीगरी से नहीं छिपेगी देश की जमीनी बदहाली’, पढ़े खबर
GDP के आंकड़ों पर सवाल, बेरोजगारी-महंगाई और आर्थिक असमानता को लेकर केंद्र सरकार पर साधा निशाना
नीमच। केंद्र सरकार की ओर से जारी पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि दर को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री श्रीमती मधु बंसल ने आर्थिक आंकड़ों को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल GDP बढ़ने का दावा करने से देश की जमीनी आर्थिक स्थिति नहीं बदल जाती। उन्होंने सरकार से आंकड़ों की गणना और वास्तविक आर्थिक हालात को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

मधु बंसल ने GDP की गणना के लिए आधार वर्ष में किए गए बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2011-12 के स्थान पर 2022-23 को आधार वर्ष बनाए जाने तथा अर्थव्यवस्था के आंकड़ों में हुए बदलावों के कारण वृद्धि दर को लेकर अलग-अलग तस्वीर सामने आ रही है। उन्होंने दावा किया कि पुराने पैमाने से तुलना करने पर वृद्धि दर काफी कम दिखाई देती है।

‘GDP बढ़ रही है तो आम आदमी की जेब क्यों खाली?’
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि सरकार को केवल GDP के आंकड़ों का प्रचार करने के बजाय यह बताना चाहिए कि आर्थिक विकास का लाभ आम जनता तक कितना पहुंच रहा है। उन्होंने महंगाई, रोजगार और आम परिवारों की आर्थिक परेशानियों को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
उन्होंने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सूचकांकों का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक विकास का आकलन केवल GDP से नहीं किया जा सकता। देश में मानव विकास, पोषण, रोजगार और आय की असमानता जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से काम करने की जरूरत है।

आर्थिक असमानता और बेरोजगारी पर भी हमला
मधु बंसल ने देश में बढ़ती आर्थिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि संपत्ति का बड़ा हिस्सा सीमित वर्ग के पास केंद्रित होना चिंता का विषय है। उन्होंने बेरोजगारी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बड़ी संख्या में युवाओं के सामने रोजगार का संकट बना हुआ है।
उन्होंने महंगाई का जिक्र करते हुए कहा कि रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुओं की कीमतों का असर सीधे आम परिवार के बजट पर पड़ता है। ऐसे में GDP की वृद्धि का दावा तभी सार्थक माना जाएगा, जब उसका असर लोगों की आय और जीवन स्तर पर भी दिखाई दे।

चीन से आयात और रुपये की स्थिति पर भी सवाल
कांग्रेस नेत्री ने चीन से बढ़ते आयात को लेकर भी केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर कई औद्योगिक क्षेत्रों और दवाओं के कच्चे माल तक में चीन पर निर्भरता चिंता का विषय है।
उन्होंने रुपये की कमजोर होती स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत का असर आयात लागत और आम उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

GDP गणना पर स्वतंत्र जांच की मांग
मधु बंसल ने केंद्र सरकार से मांग की कि GDP की गणना की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों की समिति गठित कर GDP के आंकड़ों और गणना पद्धति की समीक्षा कराई जाए तथा संसद में श्वेतपत्र लाया जाए।