NEWS: “शिक्षा, सुरक्षा और संस्कार का संगम!” इनरव्हील डायमंड ने नीमच में रचा इतिहास, दो स्कूल बने ‘हैप्पी स्कूल’, 200 छात्राओं को मिला जागरूकता का ज्ञान, पढ़े खबर
नीमच। सेवा, शिक्षा और जनजागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल करते हुए इनरव्हील क्लब ऑफ नीमच डायमंड ने दो विद्यालयों को “हैप्पी स्कूल” की सौगात देकर सराहनीय उदाहरण प्रस्तुत किया। साथ ही छात्राओं और शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता सेमिनार आयोजित कर समाज में सकारात्मक संदेश दिया।

क्लब द्वारा शासकीय प्राथमिक विद्यालय खड़ावदा एवं शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 2 को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर “हैप्पी स्कूल” बनाया गया, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर और प्रेरणादायक शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।

इसी क्रम में शासकीय सांदीपनि कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नीमच केंट में साइबर क्राइम जागरूकता, सर्वाइकल कैंसर जागरूकता और प्लास्टिक मुक्त अभियान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष सेमिनार आयोजित किए गए। इस कार्यक्रम में लगभग 200 छात्राओं और शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की और विशेषज्ञों की उपयोगी जानकारी को गंभीरता से सुना।

साइबर सुरक्षा पर खास जोर:
साइबर सेल एक्सपर्ट कुलदीप सिंह एवं प्रदीप शिंदे ने छात्राओं को ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया सुरक्षा और डिजिटल सतर्कता के बारे में जागरूक किया।

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता:
डॉ. मनीष यादव और विजय बड़ोने ने सर्वाइकल कैंसर के कारण, बचाव, टीकाकरण और समय पर जांच के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
पर्यावरण का संदेश:
कार्यक्रम में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने और कपड़े की थैलियों के उपयोग को बढ़ावा देने का संदेश देकर पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा भी दी गई।
प्रतिभा का सम्मान:
कार्यक्रम के दौरान कक्षा 10वीं की मेधावी छात्रा प्रियांशी गणपत राठौर (निवासी तेलनखेड़ी) का विशेष सम्मान किया गया। प्रियांशी ने बिना किसी कोचिंग के 99% अंक प्राप्त कर राज्य स्तरीय मेरिट सूची में 5वां स्थान हासिल कर विद्यालय, क्षेत्र और जिले का नाम रोशन किया। इस अवसर पर क्लब अध्यक्ष पूजा गर्ग, सचिव पायल गुर्जर, कोषाध्यक्ष दिव्या जैन, लक्ष्मी शर्मा सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। विद्यालय के प्राचार्य किशोर सिंह जैन एवं समस्त स्टाफ ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्राचार्य श्री जैन ने क्लब का आभार व्यक्त करते हुए ऐसे कार्यक्रमों को समय की आवश्यकता बताया। कार्यक्रम का संचालन अनिल शर्मा द्वारा किया गया।

इस पहल ने यह साबित कर दिया कि जब समाज और संगठन मिलकर काम करते हैं, तो शिक्षा के साथ-साथ जागरूकता और संस्कारों की भी मजबूत नींव रखी जा सकती है।