NEWS: समय पर भुगतान, मानदेय बढ़ाने समेत 13 मांगों को लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों ने सौंपा ज्ञापन
नीमच। महिला स्वयं सहायता समूह महासंघ (म.प्र.) एवं एमडीएम व साझा चूल्हा रसोइया संघ की ओर से महिला समूह संचालकों और रसोइया बहनों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मंगलवार को जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में प्रधानमंत्री पूरक पोषण निर्माण योजना, आंगनवाड़ी योजना और मध्यान्ह भोजन योजना से जुड़ी महिलाओं के लंबित भुगतान, मानदेय तथा कार्य परिस्थितियों से संबंधित 13 प्रमुख मांगें रखी गईं।
संगठन ने ज्ञापन में कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूह संचालक एवं रसोइया बच्चों, गर्भवती और धात्री माताओं के पोषण तथा शासकीय विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का कार्य निर्धारित मेन्यू के अनुसार कर रही हैं। इसके बावजूद सीमित मानदेय, बढ़ती लागत और भुगतान में देरी के कारण उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लाडली बहना की तरह तय तारीख पर हो भुगतान
ज्ञापन में मांग की गई कि मध्यान्ह भोजन एवं आंगनवाड़ी योजना की राशि संबंधित समूहों के खातों में प्रत्येक माह निश्चित तिथि पर जारी की जाए तथा लंबित भुगतान तत्काल कराया जाए। पूरक पोषण आहार संचालित करने वाले समूहों को भी निर्धारित राशि समय पर उपलब्ध कराने की मांग रखी गई।
संगठन ने आंगनवाड़ी में कार्यरत महिला रसोइयों के ₹500 मासिक मानदेय में वृद्धि कर सम्मानजनक मानदेय देने की मांग की। वहीं 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों तथा गर्भवती एवं धात्री माताओं के पूरक पोषण आहार की लागत और खाद्यान्न मात्रा बढ़ाने की बात कही गई।
ईंधन, ड्रेस और अतिरिक्त मानदेय की मांग
ज्ञापन में आंगनवाड़ी के लिए ईंधन एवं परिवहन की पर्याप्त राशि उपलब्ध कराने, स्कूल एवं आंगनवाड़ी की महिला रसोइयों को ड्रेस उपलब्ध कराने के लिए प्रति रसोइया ₹1,000 वार्षिक देने की मांग की गई। मध्यान्ह भोजन के बाद बच्चों की जूठी थालियां साफ करने के लिए अतिरिक्त रसोइया/सहायिका रखने अथवा अतिरिक्त मानदेय देने की मांग भी शामिल है।
इसके अलावा रसोइयों का मानदेय 10 माह के बजाय 12 माह करने, लंबे समय से कार्यरत अनुभवी रसोइयों को केवल बच्चों की संख्या कम होने के कारण नहीं हटाने, समूहों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से राहत देने और अनुबंध नवीनीकरण की अवधि पांच वर्ष करने की मांग रखी गई।
गैस व्यवस्था और ऋण को लेकर भी मांग
स्कूलों में मध्यान्ह भोजन पकाने के लिए पर्याप्त गैस सिलेंडर आसानी से उपलब्ध कराने तथा बुकिंग प्रक्रिया सरल करने की मांग की गई। संगठन ने यह भी कहा कि किसी महिला पर ऋण लेने के लिए दबाव नहीं बनाया जाए और आवश्यकता होने पर ही स्वेच्छा से ऋण आवेदन की सुविधा दी जाए। ई-केवाईसी एवं पोर्टल संबंधी प्रक्रिया में महिलाओं को अनावश्यक परेशान नहीं करने की मांग भी रखी गई।
ज्ञापन में पूर्व में दिए गए ज्ञापनों की प्राप्ति एवं उन पर हुई कार्रवाई की जानकारी संगठन को उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने की मांग की गई। साथ ही मांगों को लेकर आवाज उठाने वाली महिलाओं को अनुबंध समाप्त करने अथवा किसी अन्य को काम देने की कथित धमकियों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की गई।
संगठन ने स्पष्ट किया कि वह शासन के विरुद्ध नहीं है, बल्कि शासकीय योजनाओं को बेहतर तरीके से धरातल पर लागू करने वाली महिलाओं को समय पर भुगतान और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने के लिए मांग उठा रहा है।
ज्ञापन के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई करने का आग्रह किया गया।
ज्ञापन के दौरान जिला सचिव आशा शर्मा, जिलाध्यक्ष माया पाटीदार सहित संगठन से जुड़ी महिलाएं मौजूद रहीं।