NEWS: "आज की संतानें संपत्ति बांट रही, श्रीराम-भरत ने बांटी थी विपत्ति" — श्री गिरधर स्वामी का मार्मिक संदेश, पढ़े खबर

मनासा की श्रीराम कथा में भरत मिलाप प्रसंग सुनाकर भाईचारे, त्याग और पिता के वचन पालन का दिया प्रेरक संदेश

NEWS: "आज की संतानें संपत्ति बांट रही, श्रीराम-भरत ने बांटी थी विपत्ति" — श्री गिरधर स्वामी का मार्मिक संदेश, पढ़े खबर

मनासा। उषागंज स्थित श्रीराम मंदिर परिसर में चल रही 15 दिवसीय श्रीराम कथा के ग्यारहवें दिन सद्गुरु श्री गिरधर स्वामीजी (जयपुर) ने श्रीराम-भरत मिलाप का भावपूर्ण प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आज की संतानें पिता की संपत्ति बांटने में लगी हैं, जबकि भगवान श्रीराम और भरतजी ने संपत्ति नहीं, बल्कि विपत्ति बांटकर आदर्श भाईचारे की मिसाल कायम की थी।

उन्होंने कहा कि जब भरतजी भगवान श्रीराम के पास अयोध्या के राज्याभिषेक की समस्त सामग्री लेकर चित्रकूट पहुंचे और उन्हें वापस चलने का आग्रह किया, तब प्रभु श्रीराम ने स्पष्ट कहा कि रघुकुल की परंपरा में प्राण भले चले जाएं, लेकिन वचन नहीं टूटता। पिता महाराज दशरथ के वचन की रक्षा करना ही उनका धर्म था।

कथावाचक ने बताया कि महर्षि अत्रि के निर्देश पर राज्याभिषेक के लिए लाए गए सभी पवित्र तीर्थों के जल को एक प्राचीन कुएं में प्रवाहित किया गया, जो आज भरत कूप के नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक स्नान करने से कष्ट दूर होते हैं।

उन्होंने बताया कि भरतजी ने चित्रकूट की पांच दिन तक परिक्रमा की और प्रभु श्रीराम की आज्ञा से गुरुजनों के मार्गदर्शन में राजकाज संभालने का संकल्प लिया। विदा के समय श्रीराम की खड़ाऊं सिर पर धारण कर वे अयोध्या लौटे और 14 वर्षों तक नंदीग्राम में तपस्वी जीवन जीते हुए प्रभु की प्रतीक्षा करते रहे।

श्री गिरधर स्वामीजी ने कहा कि श्रीराम और भरत का प्रेम त्याग, समर्पण और भाईचारे की सर्वोच्च मिसाल है, जिससे आज के समाज को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। कथा के समापन पर भगवान श्रीराम की आरती हुई, प्रसाद वितरण किया गया तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।