BIG NEWS: रेल लाइन के बाद अब बायपास पर भी भड़का विरोध, 7 गांवों ने खोला मोर्चा—एसडीएम कार्यालय में धरना, सड़क जाम से जल सत्याग्रह तक की चेतावनी, पढ़े खबर

नागदा में रेल परियोजनाओं को लेकर बढ़ता आक्रोश; भाटीसुड़ा-रोहलखुर्द बायपास रद्द करने की मांग, किसानों ने कहा—पहले जवाब दो, फिर जमीन मांगो

BIG NEWS: रेल लाइन के बाद अब बायपास पर भी भड़का विरोध, 7 गांवों ने खोला मोर्चा—एसडीएम कार्यालय में धरना, सड़क जाम से जल सत्याग्रह तक की चेतावनी, पढ़े खबर

रिपोर्ट :- बबलू यादव

नागदा। नागदा क्षेत्र में रेल परियोजनाओं को लेकर विरोध अब लगातार व्यापक होता जा रहा है। तीसरी-चौथी रेल लाइन के प्रस्तावित नए सर्वे मार्ग को लेकर चल रहे विरोध के बीच अब भाटीसुड़ा-रोहलखुर्द रेल बायपास के खिलाफ भी सात गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर मैदान में उतर आए हैं। गुरुवार को रोहलखुर्द-भाटीसुड़ा रेलवे बायपास रोको संघर्ष समिति के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बिरलामंदिर से रैली निकाली और एसडीएम कार्यालय पहुंचकर धरना दिया। ग्रामीणों ने तहसीलदार मधु नायक से चर्चा के बाद एसडीएम रंजना पाटीदार को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रस्तावित बायपास को निरस्त कर वैकल्पिक मार्ग तलाशने की मांग की गई।

अब सिर्फ ज्ञापन नहीं, आंदोलन और तेज करने का ऐलान

ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। ग्रामीणों ने सड़क जाम से लेकर जल सत्याग्रह तक आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत किसानों की उपजाऊ जमीन और उनकी आजीविका छीनकर नहीं चुकाई जानी चाहिए।

सात गांवों की जमीन पर संकट, खेतों के बंटने की आशंका

प्रस्तावित बायपास से डाबरी, बनबना, बनबनी, अमलावदिया जुर्नादा, लसुड़िया जयसिंह, रुपेटा और भड़ला गांव प्रभावित होने की बात ग्रामीणों ने कही है।

किसानों का कहना है कि रेल बायपास बनने से उनकी उपजाऊ जमीन प्रभावित होगी। खेतों के टुकड़े हो जाएंगे और कई किसानों के लिए खेत तक पहुंचना भी मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों ने मांग रखी है कि बायपास को निरस्त कर वैकल्पिक मार्ग तलाशा जाए।

किसानों ने रखीं कई मांगें, चार गुना मुआवजे पर भी जोर

ग्रामीणों ने रेलवे से प्रभावित किसानों के लिए सिंगल डेस्क बनाने की मांग की है, ताकि किसानों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।

इसके साथ ही रेल लाइन के नीचे बिजली केबल और पाइपलाइन डालने की अनुमति, क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत एवं उचित मुआवजा तथा खेतों के बीच आवागमन के रास्ते सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई।

मुआवजे को लेकर ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित किसानों को सबसे अधिक गाइडलाइन वाले गांव को आधार मानकर समान रूप से चार गुना मुआवजा दिया जाए।

रेलवे से सबसे बड़ा सवाल—सर्वे आखिर किस आधार पर हुआ?

आंदोलन के बीच ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल रेलवे की कार्यप्रणाली को लेकर है। उनका कहना है कि लगातार विरोध के बावजूद रेलवे अधिकारी सामने आकर परियोजना की पूरी जानकारी जनता को नहीं दे रहे हैं।

ग्रामीण जानना चाहते हैं—

सर्वे किस आधार पर किया गया?

तकनीकी रिपोर्ट क्या कहती है?

अलाइनमेंट में बदलाव क्यों किया गया?

नए सर्वे का आधार क्या है?

इस परियोजना से शहर और गांवों को वास्तविक लाभ क्या मिलेगा?

ग्रामीणों का कहना है कि इन सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने तक उनका विरोध जारी रहेगा।

जनप्रतिनिधियों से भी सवाल—ज्ञापन के बाद अब समाधान कब?

ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से लेकर रेल मंत्रालय तक कई बार अपनी बात पहुंचाई जा चुकी है, लेकिन प्रभावित किसानों की समस्या अभी भी बनी हुई है।

ग्रामीणों का सवाल है कि क्या केवल ज्ञापन सौंपने से जिम्मेदारी पूरी हो जाएगी या फिर जनप्रतिनिधि रेलवे अधिकारियों को प्रभावित ग्रामीणों के बीच लाकर सर्वे, अलाइनमेंट और परियोजना से जुड़े सवालों के जवाब भी दिलाएंगे?

नागदा को मिलेंगी ट्रेनें या बढ़ जाएगा बायपास का संकट?

रेल परियोजनाओं को लेकर शहरवासियों के बीच भी कई सवाल उठ रहे हैं। लोगों का सवाल है कि यदि ट्रेनों का मार्ग बदला गया तो क्या एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव नागदा में पहले जैसा रहेगा?

यदि कुछ ट्रेनें नागदा से बाहर निकलती हैं तो यात्रियों के लिए रेलवे क्या व्यवस्था करेगा? क्या यात्रियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी?

ग्रामीणों और शहरवासियों का कहना है कि यदि विकास के नाम पर जमीन ली जा रही है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि उस विकास का सीधा लाभ नागदा और आसपास के लोगों को क्या मिलेगा।

अंडरपास को लेकर बारिश में बढ़ सकती है परेशानी की आशंका

तीसरी-चौथी रेल लाइन के नए सर्वे से जुड़े सैटेलाइट नक्शों में कई अंडरपास, ओवरब्रिज और रेलवे ब्रिज दिखाई देने की बात भी सामने आई है।

ग्रामीणों की चिंता है कि बारिश के मौसम में यदि अंडरपास में पानी भर गया तो गांवों का शहर से संपर्क प्रभावित हो सकता है। नागदा क्षेत्र में अंडरपास में जलभराव के पुराने अनुभवों को देखते हुए ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जो व्यवस्था नक्शे में दिखाई दे रही है, वह भारी बारिश के दौरान जमीन पर कितनी कारगर साबित होगी?

अब फैसला रेलवे के हाथ में—बातचीत होगी या आंदोलन बढ़ेगा?

नागदा में रेल परियोजनाओं का विरोध अब किसी एक गांव तक सीमित नहीं रह गया है। तीसरी-चौथी रेल लाइन के बाद अब भाटीसुड़ा-रोहलखुर्द बायपास के खिलाफ सात गांवों का एकजुट होकर आंदोलन में उतरना रेलवे के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सर्वे का आधार, तकनीकी रिपोर्ट, अलाइनमेंट, मुआवजा, खेतों तक पहुंच और यात्री सुविधाओं पर स्पष्ट जवाब जरूरी है।

अब निगाह रेलवे और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। सवाल यही है—रेलवे जनता के बीच बैठकर समाधान का रास्ता निकालेगा या फिर सड़क पर उतरते आंदोलन का सामना करेगा?