BREAKING NEWS: जीरन में केबल चोरी का खेल! चोर किसानों ने पकड़े, फिर भी नेटवर्क तक क्यों नहीं पहुंची पुलिस?, पढ़े खबर

BREAKING NEWS: जीरन में केबल चोरी का खेल! चोर किसानों ने पकड़े, फिर भी नेटवर्क तक क्यों नहीं पहुंची पुलिस?, पढ़े खबर

जीरन। जीरन थाना क्षेत्र में खेतों से मोटर की केबल चोरी की लगातार हो रही घटनाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कई वर्षों से जारी चोरी की घटनाओं को लेकर किसानों में नाराजगी है और अब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में सिंचाई के लिए जरूरी मोटर केबल बार-बार चोरी हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन चोरी के पूरे नेटवर्क तक पुलिस की कार्रवाई अब तक नहीं पहुंच सकी है।

मामला 13 सितंबर 2026 का है। अघोरिया गांव के किसानों ने कथित रूप से केबल चोरी करते हुए आरोपियों को घेराबंदी कर पकड़ लिया और उन्हें जीरन पुलिस के हवाले किया। इसके बाद बड़ी संख्या में किसान जीरन थाने पहुंचे और थाना घेराव करते हुए अपनी मांगें पुलिस के सामने रखीं।

किसानों ने रखीं थीं ये मांगें

थाने पहुंचे किसानों की प्रमुख मांग थी कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, चोरी की केबल खरीदने वाले कबाड़ियों और अन्य खरीदारों तक पुलिस पहुंचे तथा इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के नाम सामने लाए जाएं। किसानों ने यह भी मांग उठाई थी कि पकड़े गए आरोपियों का गांव में जुलूस निकाला जाए, ताकि चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगे और लोगों में कानून का भय बने।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, थाना प्रभारी किसानों के बीच बैठकर उनकी बातें सुनते हुए नजर आए थे। किसानों का कहना है कि उस दौरान उनकी मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया था। इसके बाद किसानों ने 'जय जवान-जय किसान' के नारे लगाए और उम्मीद जताई कि अब केबल चोरी के मामले में ठोस कार्रवाई होगी।

लेकिन किसानों का आरोप है कि थाना घेराव के बाद भी उनकी मांगों के अनुरूप कार्रवाई सामने नहीं आई।

'चोर हमने पकड़कर दिए, फिर नेटवर्क तक पुलिस क्यों नहीं पहुंची?'

किसानों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उन्होंने स्वयं घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया, तो फिर इस मामले के पीछे सक्रिय पूरे नेटवर्क का खुलासा क्यों नहीं हो पाया?

किसानों का कहना है कि क्षेत्र में डोडा-चूरा और अफीम तस्करी के मामलों में पुलिस का मुखबिर तंत्र तस्करों और उनके नेटवर्क तक पहुंच जाता है, लेकिन पिछले 3-4 वर्षों से सामने आ रही केबल चोरी की घटनाओं में वही तंत्र सक्रिय क्यों नजर नहीं आता?

किसानों का सवाल है कि क्या पुलिस का मुखबिर तंत्र केवल डोडा-चूरा और अफीम तस्करी के मामलों तक सीमित है? खेतों में लगातार हो रही केबल चोरी के नेटवर्क तक पुलिस क्यों नहीं पहुंच पा रही है?

किसानों का कहना है कि जिस काम की जिम्मेदारी पुलिस की है, उसमें उन्हें स्वयं चोरों को पकड़कर पुलिस के हवाले करना पड़ा। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

खरीदने वालों तक पहुंचने का दावा, फिर कार्रवाई कहां?

इसी बीच किसानों के बीच यह बात भी सामने आई है कि जीरन पुलिस कथित रूप से चोरी की केबल खरीदने वाले कुछ व्यापारियों तक भी पहुंची थी। बताया जा रहा है कि इनमें पिपलियामंडी और मल्हारगढ़ क्षेत्र के कुछ व्यापारी शामिल हैं।

हालांकि इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी अथवा आधिकारिक कार्रवाई सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में किसानों का सवाल है कि यदि चोरी की केबल खरीदने वालों तक पुलिस पहुंची थी तो फिर आगे क्या कार्रवाई हुई? क्या खरीदारों से पूछताछ की गई? क्या चोरी का माल बरामद हुआ? और क्या इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के नाम सामने आए?

इन सवालों के जवाब किसानों को अब भी नहीं मिले हैं।

किसानों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ

किसानों का कहना है कि खेत में सिंचाई के लिए मोटर और केबल बेहद जरूरी हैं। बार-बार केबल चोरी होने से उन्हें नई केबल खरीदनी पड़ती है और अतिरिक्त आर्थिक भार उठाना पड़ता है। इससे खेती की लागत भी बढ़ रही है।

किसानों ने कहा कि एक ओर प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने और खेती को मजबूत बनाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर खेतों में सिंचाई के लिए उपयोग होने वाली मोटर केबल तक सुरक्षित नहीं है। लगातार चोरी की घटनाओं से किसान परेशान हैं और अब वे इस मामले में स्थायी समाधान चाहते हैं।

एसपी से गिरोह का पर्दाफाश करने की मांग

किसानों ने जिला पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि जीरन थाना क्षेत्र में पिछले वर्षों से सामने आ रही केबल चोरी की घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पूरे नेटवर्क की जांच कराई जाए। किसानों का कहना है कि केवल चोरों को पकड़ने से मामला खत्म नहीं होगा, बल्कि चोरी की केबल खरीदने वालों और इस पूरे खेल से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचना जरूरी है।

अब सवाल यह है कि 13 सितंबर को किसानों द्वारा पकड़े गए आरोपियों से पुलिस पूछताछ में क्या सामने आया और चोरी की केबल के कथित खरीदारों तक पहुंचने के बाद पुलिस ने आगे क्या कार्रवाई की? किसानों को इसी का इंतजार है।